माँ -माटी – मानुष का इस्लामीकरण।

बंगाल भारत का एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत से भरा पड़ा राज्य रहा है . इस राज्य की कला व साहित्य में अपनी एक अलग पहचान रही है .वैसे बंगाल के मिट्टी में एक अलग क्रांति सदियों से रही है . इस मिट्टी के सपूतों ने माँ भारती व सनातनी परंपरा को दुनिया का सिरमौर बना डाला .
जब बंगला साहित्य की बात करे तो इस धरा के साहित्यकारों ने साहित्य जगत में अपनी अलग अमिट छाप छोड़ी है लेकिन अब ? 

साथियों, पिछले कुछ दशकों से बंगाल के प्रगतिशील सोचँ को एक साजिश के तहत कुचलने का साजिश किया गया जो सफल नजर आ रही है। आज बंगाल हर क्षेत्र में पिछड़ते चला जा रहा है, चाहे वो साहित्य हो या फिर औद्योगिक हो या फिर कला या फिर मुर्धन्यता !

दोस्तों, बंगाल में शक्ति की पूजा जन्म-जन्मान्तरों से चली आ रही है . लेकिन आज कही न कही उसको भी रोकने व बंद करने/ रोकने का कुत्सित प्रयास भी एक बड़ी साजिश के तहत किया गया है . पहले वामपंथ ने बंगाल को उद्योग विहीन किया फिर ममता ने एक बड़े संयंत्र के तहत यहां की संस्कृति विरासत को समाप्त करने की योजना पर काम कर रही है ताकि आने वालों वर्षों में हमारी नस्लों को हमारे परंपरा,हमारी सांस्कृतिक पहचान से काटा जा सकें।

पुरे बंगाल में एक सुनियोजित तरीके से बांग्लादेशी घुसपैठियों को लगातार सीमा से लगे क्षेत्रों में बसाया जा रहा है और कुछ वर्षों बाद उन्हें अलग -अलग शहरीय क्षेत्रों में भेज कर उनके पहचान पत्रों से लेकर तमाम कागजों को बना उनको सरकारी योजनायों का लाभ अपने राजनितिक फायदे के लिए दिया जा रहा है .

बंगाल के सांस्कृतिक पहचान को इस्लामिक पहचान में तब्दील किया जा रहा कोई रोकने – टोकने वाला नही है . आप पूरे बंगाल में कई मंजिले मस्जिदों को देख सकते है जो बिगत वर्षों की बनायी गया है। 
बड़ी बाजार के पास तो बहुत बड़ा सा गेट बनाया गया है जिसका नाम है “ना खुदा मस्जिद द्वार”
बंगाल भारत का एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत से भरा पड़ा राज्य रहा है . इस राज्य की कला व साहित्य में अपनी एक अलग पहचान रही है .वैसे बंगाल के मिट्टी में एक अलग क्रांति सदियों से रही है . इस मिट्टी के सपूतों ने माँ भारती व सनातनी परंपरा को दुनिया का सिरमौर बना डाला .
जब बंगला साहित्य की बात करे तो इस धरा के साहित्यकारों ने साहित्य जगत में अपनी अलग अमिट छाप छोड़ी है लेकिन अब ? 
साथियों, पिछले कुछ दशकों से बंगाल के प्रगतिशील सोचँ को एक साजिश के तहत कुचलने का साजिश किया गया जो सफल नजर आ रही है। आज बंगाल हर क्षेत्र में पिछड़ते चला जा रहा है, चाहे वो साहित्य हो या फिर औद्योगिक हो या फिर कला या फिर मुर्धन्यता !

दोस्तों, बंगाल में शक्ति की पूजा जन्म-जन्मान्तरों से चली आ रही है . लेकिन आज कही न कही उसको भी रोकने व बंद करने/ रोकने का कुत्सित प्रयास भी एक बड़ी साजिश के तहत किया गया है . पहले वामपंथ ने बंगाल को उद्योग विहीन किया फिर ममता ने एक बड़े संयंत्र के तहत यहां की संस्कृति विरासत को समाप्त करने की योजना पर काम कर रही है ताकि आने वालों वर्षों में हमारी नस्लों को हमारे परंपरा,हमारी सांस्कृतिक पहचान से काटा जा सकें।
पुरे बंगाल में एक सुनियोजित तरीके से बांग्लादेशी घुसपैठियों को लगातार सीमा से लगे क्षेत्रों में बसाया जा रहा है और कुछ वर्षों बाद उन्हें अलग -अलग शहरीय क्षेत्रों में भेज कर उनके पहचान पत्रों से लेकर तमाम कागजों को बना उनको सरकारी योजनायों का लाभ अपने राजनितिक फायदे के लिए दिया जा रहा है .

बंगाल के सांस्कृतिक पहचान को इस्लामिक पहचान में तब्दील किया जा रहा कोई रोकने – टोकने वाला नही है . आप पूरे बंगाल में कई मंजिले मस्जिदों को देख सकते है जो बिगत वर्षों की बनायी गया है। 
बड़ी बाजार के पास तो बहुत बड़ा सा गेट बनाया गया है जिसका नाम है “ना खुदा मस्जिद द्वार”
यह गेट ऐसे जगह जबरिया बनाया गया है जहाँ सैकड़ों वर्षों पुरानी बिल्डिंगे बनी है जोकि अपने एक अलग पहचान है उनकी . कोलकाता शहर की हेरिटेज इमारतों में से एक है लेकिन उनके दोनों तरफ बहुत बड़े आकार में जबरिया बना दिया गया .
जबकी मस्जिद बहुत आगे है उसके ठीक पहले भगवन शंकर का शिवालय है जोकि सदियों पुराना है . 
मस्जिद को एक सेठ ने अपने एक परिचित तवायफ के लिए अपने पैसे से बनाया था और उनको एक रूपये में बेच दिया क्योंकि इस्लाम में खुदा का घर किसी काफिर के पैसे से नही बना सकते . पहले उसमे नमाज नही अदा करते थे लेकिन धीरे-धीरे करने लगे . उस मस्जिद का नाम ना खुदा मस्जिद है .
पुरे इलाका में लगातार बहाबियत को बसाया गया और फिर वोट के लिए इस शहर के सांस्कृतिक पहचान को लील दिया गया .
यह काम पूरे बंगाल में बहुत बड़े पैमाने पर जोरो से चल  है . बंगाल के राज्य का एक बड़ा बजट ममता ने मदरसों व मस्जिदों पर खर्च कर रही है ताकि उनके वोट व सत्ता को कही कोई आंच न आये .